वैदिक गणित का इतिहास और विकास

भारत का अतीत एक समृद्ध बौद्धिक विविधता संजोए हुए है और इसे हमेशा से ही कई क्षेत्रों में अपने अतुलनीय योगदान, उन्नति और उपलब्धियों के लिए जाना और सराहा भी जाता है। यह सबसे महान प्राचीन सभ्यताओं में से एक है अपनी अनूठी विरासत के कारण दुनिया भर में इसका महिमामण्डन एवं सम्मान किया जाता रहा है।

भारत ने दुनिया की अनेकों समस्याओं का समाधान दिया है। अपने सरल समाधानों के माध्यम से इसने दुनिया को विशेष रूप से विज्ञान और गणित के क्षेत्र में आगे बढ़ने और प्रगति करने में मदद की है। 5वीं सदी में आर्यभट्ट के समय में शून्य का आविष्कार विश्व के सबसे महान योगदानों में से एक है इसके साथ ही भारत ने जिस दशमलव पद्धति का आविष्कार किया वो आज भी गणितीय अवधारणाओं में प्रयुक्त होती है।

भारत में अनेक खगोल शास्त्री और गणितज्ञ जैसे भाष्कराचार्य, ब्रह्मगुप्त, माधव आदि हुए जिन्होंने अपने निरंतर परिश्रम के बल से अद्वतीय सफलताएँ  अर्जित करके विश्व जगत के पथ प्रदर्शक की भूमिका निभाई यह इस संदर्भ में है कि एक आध्यात्मिक गुरु जो कि एक गणितज्ञ भी थे, उन्होने भारत में 20वीं शताब्दी की शुरुआत में एक पुस्तक लिखी थी। जैसा कि कहा जाता है, कि वह 1911 और 1918 के बीच दक्षिण भारत के जंगलों में एकांत में चले गए और लगभग एक दशक तक ध्यान और शोध करके दिमागी गणितीय गणनाओं को अधिक तेज गति से करने लिए एक सरल तरीके को लेकर आए।

पिछले 55 वर्षों में, जब से यह पुस्तक प्रकाशित हुई है, तब से काफी कुछ बदल गया है, अब शैक्षणिक छात्र समुदाय सामान्यतः तीर्थजी द्वारा दिये गए तरीकों को पसंद करने लगा है। यह मानसिक गणित के लिए बहुत ही अच्छा  संकेत है और महत्वपूर्ण भी है और इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवारों के लिए भी इसके महत्व को नकारा नहीं जा सकता है।

इंटरनेट के आ जाने से वैदिक गणित को और भी अधिक लोकप्रियता मिली है जिससे गणित सुस्त और उबाऊ लगने के बजाय एक मजेदार और दिलचस्प विषय बन गई है वर्ष 2020 में गूगल पर एक सर्च में 35,90,000 से अधिक परिणाम मिलते है

न्यूयार्क में TED यूट्यूब चैनल पर श्री गौरव टेकरीवाल जी ने एक ट़ॉक दी थी, जिसका शीर्षक “The magic of vedic maths” है इस ट़ॉक को अब तक तीस लाख से भी ज्यादा लोगों द्वारा देखा गया है, शायद इसी टॉक ने ही 21 वीं सदी में दुनिया भर के छात्रों को वैदिक गणित से परिचित कराया है। आज अमेज़न पर बड़ी संख्या में वैदिक गणित की पुस्तकें उपलब्ध हैं और उनमें से कुछ पुस्तकें अमेज़न के ई-बुक स्टोर किण्डल पर भी मिलती हैं। वैदिक गणित सीखने के लिए अब सैकड़ों मोबाइल एप्लीकेशन्स, एप्पल के एप्प स्टोर और गूगल के प्ले स्टोर पर उपलब्ध हैं। उनमें से कुछ एप्प आपको वैदिक गणित प्रणाली को अच्छे ढंग से सिखाने के लिए मशीन लर्निंग का प्रयोग भी करते हैं।

ऐसा ज्ञान, पहले कई देश जिसकी आलोचना किया करते थे, आज वही देश अपने गिरते हुए गणित के स्तर से परेशान होकर इसकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं। आज वैदिक गणित प्रणाली वैश्विक स्तर पर अपनी अमिट छाप छोड़ रही है।

आज हजारों छात्र udemy और skill share जैसी बेवसाइट पर वैदिक गणित सीख रहे हैं। ऑन डिमांड़ सेटेलाइट DTH आपरेटर्स जैसे टाटा स्काई बीम भी वैदिक गणित के कार्यक्रमों को अपने चैनलों पर चलाते हैं। वैदिक गणित की समझ बेहतर करने के लिए अधिकाधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए चौबीसों घंटे ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाता है, भारत में वैदिक गणित को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, सिलवासा और पंजाब समेत पूरे देश में लाया जा रहा है। भारत, यू.एस.ए. , ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, यूएई, सीरिया, घाना, ट्यूनिशिया आदि कई देशों में बहुत सी शैक्षणिक संस्थाएं और बहुत से उद्यमी भी इसमें रुचि ले रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि वैदिक गणित भारत का दुनिया को दिया अनमोल उपहार है।

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